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किसान भाइयों आप अच्छी तरह जानते हैं, खेती में फसल का उत्पादन कम होता जा रहा है।
भूमि दिन प्रतिदिन बंजर होती जा रही है।
रासायनिक खादों के उपयोग के दिन से लगातार भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो रही है जिसके कारण अधिक मात्रा में रासायनिक खादों का उपयोग करना पड़ता है।
और इसी के कारण उत्पादन अपेक्षित स्तर से लगातार घटता जा रहा है।
कभी आपने सोचा है क्या…
आईये इस चिंतन मिलन मंथन में आइए जिसमें हमें jointly मिलकर आगे बढ़ने का प्रयास करना पड़ेगा।
जैविक खेती करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण एवं जानकारी निशुल्क दी जाएगी।
गांव के हर किसान तक हम पहुंचें और हर किसान गांव स्तर पर जैविक खेती के महत्व को आत्मसात करना आवश्यक है क्योंकि यही भविष्य है।
अब वह समय नहीं रहा कि हम केवल सरकार या कृषि वैज्ञानिकों के भरोसे बैठें, हमें खुद आगे बढ़कर अपने खेत और परिवार को बचाना है।
जैविक खेती का रास्ता आसान है, इसमें कम लागत में अधिक लाभ है।
हम अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण और परिवार को सुरक्षित कर सकते हैं।
हमें अपनी खेती में गोबर खाद, हरी खाद, वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद, नीम, गौमूत्र, छाछ आदि का प्रयोग बढ़ाना होगा।
हमारे पास जो संसाधन हैं उन्हीं के माध्यम से खेती का सुधार एवं आय में वृद्धि संभव है।
सरल, सस्ती एवं सुलभ तकनीक अपनाकर हम जैविक खेती की ओर बढ़ सकते हैं।
तो आइए जैविक क्रांति के इस शुभ अवसर में सहभागी बनें और खेती के माध्यम से देश निर्माण में अपना योगदान करें।
- रासायनिक खादों से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है।
- 76% सब्ज़ियाँ, पानी और भोजन प्रदूषित हो रहे हैं।
- कैंसर, हृदय रोग जैसी बीमारियाँ रसायनों के कारण बढ़ रही हैं।
- जैविक खेती कम लागत में अधिक लाभ देती है।
- जैविक उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण-संरक्षण में सहायक होते हैं।
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